Monday, October 5, 2009

फेला दे बाहें ...

ज़माने के लिए

नहीं हैं मेरी आहें

कोई तो समझकर

अपना

फेला दे बाहें ........

शैले "ज्वलंत"

आपका काटा तो पानी भी नहीं मांगता ..........

वह जहरीले नागों की बीबों से,
सुरक्षित निकल
आया किसी ने न तो उसे
काटा,न ही छेड़ा
होकर
आश्चर्यचिकित
उसने एक रचनाधर्मी नाग से
पूछा इसका कारण.......?रचनाधर्मी नाग ने मुस्कराते हुए कहा
आपके आगे हम कहाँ लगते
हैं हमारा काटा तो झाड़ फूकं देता है
ओझा
आपका काटा तो पानी भी नहीं मांगता.......

शैलेन्द्र सक्सेना "ज्वलंत"

++-*9963258/