एक वर्ग ---------------
मोसम प्यारा तेज हवा है
एक वर्ग हर्षाता है
दूर कहीं झोंपड़ मैं वेठा
एक वर्ग डर जाता है
एक वर्ग है खड़ा धूप मैं
एक वर्ग पर छाता है
एक पिए जी भर कर शरवत
एक पसीना पाता है
साँझ को डिनर,रात रस भरी
एक वर्ग पा जाता है
रुखी सूखी वासी रोटी
एक वर्ग खा पाता है
हिन्दू-मुस्लिम-सिख -ईसाई
एक खून एक नाता है
गली-गली मैं आखिर क्यों फिर
दंगा-खूं हो जाता है
ऐसी कैसी मानवता यह
समझ नहीं कुछ आता है
एक वर्ग का हिस्सा सारा
एक वर्ग खा जाता है
Wednesday, September 30, 2009
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